कितनी फ़िक्र है कुदरत को मेरी तन्हाई की, जागते रहते हैं रात भर सितारे मेरे लिए। #Shayari by Shubh


 कितनी फ़िक्र है कुदरत को मेरी तन्हाई की,
 जागते रहते हैं रात भर सितारे मेरे लिए।
 #Shayari by Shubh

No comments:

Post a Comment

जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh

 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,  में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।  #Shyari by Shubh