जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh


 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,
 में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।
 #Shyari by Shubh

चलती फिरती आंखों से अजां देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी लेकिन मां देखी है। #Shayari by Shubh


 चलती फिरती आंखों से अजां देखी है,
 मैंने जन्नत तो नहीं देखी लेकिन मां देखी है।
 #Shayari by Shubh

अब जिस के जी में आये वही पाये रौशनी, हम ने तो दिल जला कर सरेआम रख दिया। #Shayari by Shubh


 अब जिस के जी में आये वही पाये रौशनी,
 हम ने तो दिल जला कर सरेआम रख दिया।
 #Shayari by Shubh 

एक लफ्ज मोहब्बत का इतना सा फसाना है, सिमटे तो दिल-ए-आशिक बिखरे तो जमाना है। #Shayari by Shubh


 एक लफ्ज मोहब्बत का इतना सा फसाना है,
 सिमटे तो दिल-ए-आशिक बिखरे तो जमाना है।
 #Shayari by Shubh 

खयालों में उसके मैंने बिता दी ज़िंदगी सारी, इबादत कर नहीं पाया खुदा नाराज़ मत होना । #Shayari by Shubh


  खयालों में उसके मैंने बिता दी ज़िंदगी सारी,
  इबादत कर नहीं पाया खुदा नाराज़ मत होना ।
 #Shayari by Shubh

उस शख्स में बात ही कुछ ऐसी थी, हम अगर दिल न देते तो जान चली जाती। #Shayari by Shubh


 उस शख्स में बात ही कुछ ऐसी थी,
 हम अगर दिल न देते तो जान चली जाती।
 #Shayari by Shubh

मस्त आंखों पर घनी पलकों की छाया यूँ थी, जैसे कि हो मैखाने पर घरघोर घटा छाई हुई। #Shayari by Shubh


 मस्त आंखों पर घनी पलकों की छाया यूँ थी,
 जैसे कि हो मैखाने पर घरघोर घटा छाई हुई।
 #Shayari by Shubh

जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh

 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,  में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।  #Shyari by Shubh