मस्त आंखों पर घनी पलकों की छाया यूँ थी, जैसे कि हो मैखाने पर घरघोर घटा छाई हुई। #Shayari by Shubh


 मस्त आंखों पर घनी पलकों की छाया यूँ थी,
 जैसे कि हो मैखाने पर घरघोर घटा छाई हुई।
 #Shayari by Shubh

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जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh

 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,  में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।  #Shyari by Shubh