शायद खुशी का दौर भी आ जाए एक दिन, ग़म भी तो मिल गये थे तमन्ना किये बगैर। #Shubh


 शायद खुशी का दौर भी आ जाए एक दिन,
 ग़म भी तो मिल गये थे तमन्ना किये बगैर।
 #Shayari by Shubh 

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जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh

 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,  में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।  #Shyari by Shubh