बला है क़हर है आफ़त है फ़ित्ना है क़यामत है हसीनों की जवानी को जवानी कौन कहता है। #Shayari by Shubh

बला है क़हर है आफ़त है फ़ित्ना है क़यामत है हसीनों की जवानी को जवानी कौन कहता है। #Shayari by Shubh

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जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh

 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,  में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।  #Shyari by Shubh