हर्फ़-हर्फ़ इस कदर था तल्खियों से भरा, आखिरी ख़त तेरा दीमक से भी खाया ना गया। #Shayari by Shubh


 हर्फ़-हर्फ़ इस कदर था तल्खियों से भरा,
 आखिरी ख़त तेरा दीमक से भी खाया ना गया।
 #Shayari by Shubh

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जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh

 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,  में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।  #Shyari by Shubh