छेड़ आती हैं कभी लब तो कभी रूखसारों को तुमने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पर चढा रखा है। #Shayari by Shubh


 मंजिल भी तुम हो तलाश भी तुम हो,
 उम्मीद भी तुम हो आस भी तुम हो,
 इश्क भी तुम हो और जूनूँ भी तुम ही हो,
 अहसास तुम हो प्यास भी तुम ही हो। #Shayari by Shubh 

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जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ, में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ। #Shyari by Shubh

 जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूँ,  में खुदा से पहले मेरी माँ को जानता हूँ।  #Shyari by Shubh